
24CITYLIVE नई दिल्ली/डैस्क:भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एक दूरगामी कदम उठाया है। प्राधिकरण ने ‘दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (तेरहवाँ संशोधन) विनियमन, 2026’ का मसौदा आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को रिचार्ज पैक के चुनाव में अधिक स्वतंत्रता और वित्तीय बचत का अवसर प्रदान करना है। यह नया संशोधन उन उपभोक्ताओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है जिन्हें इंटरनेट डेटा की आवश्यकता नहीं होती और वे केवल कॉल या मैसेजिंग सेवाओं पर ही निर्भर रहते हैं।
इस बदलाव की पृष्ठभूमि में ट्राई द्वारा 2024 में जारी किया गया बारहवाँ संशोधन विनियमन है। उस समय यह अनिवार्य किया गया था कि हर सेवा प्रदाता को कम से कम एक ऐसा विशेष टैरिफ वाउचर (एसटीवी) रखना होगा जो केवल वॉयस और एसएमएस की सुविधा देता हो। हालांकि, बाजार की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि टेलीकॉम कंपनियां ऐसे पैक बहुत ही सीमित संख्या में और सीमित विकल्पों के साथ उपलब्ध करा रही हैं। इसके चलते उन उपभोक्ताओं के पास कोई चारा नहीं बचता था जो डेटा का उपयोग नहीं करते, फिर भी उन्हें महंगे कॉम्बो पैक खरीदने पड़ते थे।
विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त फीडबैक और उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को देखते हुए अब प्राधिकरण ने नियमों को और सख्त और स्पष्ट करने का निर्णय लिया है। नए मसौदे के अनुसार, अब टेलीकॉम कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे जिस भी अवधि का डेटा पैक (वॉयस + डेटा + एसएमएस) बाजार में उतारेंगी, ठीक उसी वैधता अवधि का एक ‘केवल वॉयस और एसएमएस’ वाला पैक भी उपलब्ध कराना होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई कंपनी 28 दिन या 84 दिन का डेटा पैक देती है, तो उसे उसी अवधि का बिना डेटा वाला सस्ता विकल्प भी देना होगा, जिसकी कीमत डेटा वाले पैक के मुकाबले आनुपातिक रूप से काफी कम रखी जाएगी।
यह पहल विशेष रूप से बुजुर्गों, ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं और उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो साधारण फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं। ट्राई का मानना है कि इस कदम से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अनावश्यक वित्तीय बोझ भी कम होगा। अब ग्राहकों को अपनी जरूरत के हिसाब से ही पैसे चुकाने होंगे, न कि उन सेवाओं के लिए जिन्हें वे इस्तेमाल ही नहीं करते।
ट्राई ने इस क्रांतिकारी मसौदे को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया है ताकि इस पर व्यापक विचार-विमर्श हो सके।
इस विनियमन को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों, टेलीकॉम कंपनियों और आम जनता से लिखित सुझाव मांगे गए हैं। कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्था आगामी 28 अप्रैल 2026 तक अपने विचार और आपत्तियां इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ट्राई के सलाहकार को भेज सकते हैं। प्राप्त सुझावों के विश्लेषण के बाद ही इसे अंतिम रूप देकर देशभर में लागू किया जाएगा, जो भारतीय दूरसंचार बाजार की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।




