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पटना DM की बड़ी कार्रवाई: फर्जीवाड़ा करने वाले राजस्व कर्मचारी मधेश राम सेवा से बर्खास्त


24CITYLIVE/आदर्श सिंह/पटना: कार्यों में घोर लापरवाही, पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ पटना जिला प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत एक बड़ी कार्रवाई की है। पटना के जिलाधिकारी (DM) ने फर्जी लगान रसीद के आधार पर जमाबंदी कायम करने के प्रमाणित आरोप में राजस्व कर्मचारी श्री मधेश राम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। आरोपी कर्मचारी वर्तमान में पुनपुन अंचल कार्यालय में पदस्थापित थे।
क्या है पूरा मामला?
जांच में यह बात पूरी तरह प्रमाणित हुई है कि  मधेश राम ने मसौढ़ी अंचल कार्यालय में अपनी पदस्थापना के दौरान पद का दुरुपयोग करते हुए नियम के विपरीत कार्य किया। उन्होंने भू-धारियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने की मंशा से फर्जी लगान रसीदें काटीं और उसी के आधार पर लैंड पजेशन सर्टिफिकेट (LPC) निर्गत करने की अनुशंसा भी कर दी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने साल 2019-20 में आवेदकों के नाम से फर्जी तरीके से लगान रसीद तैयार कर जारी कर दी थी, जबकि वह जमाबंदी उस समय अस्तित्व में ही नहीं थी। वह जमाबंदी बाद में साल 2021-22 में विभिन्न दाखिल-खारिज वादों और अन्य आदेशों के जरिए कायम हुई। इस प्रकार पहले जाली रसीद काटी गई और बाद में जमाबंदी कायम की गई, जिसमें राजस्व कर्मचारी की सीधी मिलीभगत साबित हुई।
जांच में दोषी पाए गए, स्पष्टीकरण को बताया मनगढ़ंत
अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), मसौढ़ी द्वारा आरोप पत्र गठित किए जाने के बाद जिलाधिकारी ने इस मामले की विधिवत अनुशासनिक जांच कराई थी। इसके लिए अपर समाहर्ता, पटना को संचालन पदाधिकारी और अंचल अधिकारी (CO), मसौढ़ी को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया था।
विभागीय कार्यवाही के दौरान आरोपी राजस्व कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया, लेकिन वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जिलाधिकारी ने बताया कि कर्मचारी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण पूरी तरह बनावटी और मनगढ़ंत था, जिससे उनकी गलत मंशा साफ उजागर होती है। सभी आरोप शत-प्रतिशत प्रमाणित होने के बाद उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
“भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, कार्यालय की छवि धूमिल करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे” — DM
मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यह मामला घोर कदाचार की श्रेणी में आता है और ऐसी अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कृत्य से कार्यालय की छवि धूमिल हुई है और ऐसे कर्मचारी का सेवा में बने रहना लोकहित के बिल्कुल खिलाफ है।
“सरकारी दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति को जिला प्रशासन अक्षरशः लागू कर रहा है। सभी अधिकारी जनहित के कार्यों को पूर्ण पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ सर्वोच्च प्राथमिकता पर निष्पादित करें।” > — जिलाधिकारी, पटना

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