चौक थाना मोड़ पर चाय दुकानों के साथ कई अन्य अवैध कब्जों से बढ़ी परेशानी, थम नहीं रही जाम की रफ्तार

पटना (24CityLive)। राजधानी पटना के ऐतिहासिक चौक थाना मोड़ पर स्थिति दिनोंदिन विकट होती जा रही है। मुख्य मोड़ और आसपास के रास्तों पर न केवल चाय दुकानें, बल्कि फल, नाश्ता, ठेला-खोमचा और अन्य कई तरह के अवैध कब्जे पसरे हुए हैं। इन अनधिकृत दुकानों के कारण सड़क काफी संकरी हो गई है, जिससे दिनभर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
नगर निगम के चालान भी बेअसर, जुर्माने के बाद फिर सज रहीं दुकानें
अतिक्रमण की इस गंभीर समस्या को लेकर नगर निगम की टीम और स्थानीय पुलिस-प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। इस दौरान दुकानदारों पर चालान काटा जाता है और भारी जुर्माना भी वसूला जाता है। हालांकि, इस प्रशासनिक कार्रवाई का डर दुकानदारों में जरा भी देखने को नहीं मिल रहा है। नगर निगम की टीम के हटते ही अतिक्रमणकारी फिर से अपनी दुकानें और सामान सड़क पर फैलाकर बैठ जाते हैं।
चालान को ‘व्यापार का सामान्य खर्च’ मान रहे अतिक्रमणकारी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि महज चालान काटना इस समस्या का कोई हल नहीं साबित हो रहा है। अवैध कब्जा करने वाले दुकानदार नगर निगम के जुर्माने को अपने व्यापार का सामान्य खर्च मानकर आसानी से भर देते हैं और दोबारा कब्जा जमा लेते हैं। थाना के ठीक सामने लगातार कई तरह की अवैध दुकानों के लगने के बावजूद कोई स्थायी समाधान न निकलना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
एक ही लेन में रेंगती गाड़ियां, बना रहता है हादसे का अंदेशा
मोड़ पर पर्याप्त स्पेस न मिलने के कारण दो पहिया, चार पहिया वाहन और ई-रिक्शा एक ही लेन में फंसकर रेंगने को मजबूर हैं। पीक आवर्स के दौरान स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि एंबुलेंस और स्कूल वाहनों को भी रास्ता नहीं मिल पाता। मोड़ पर दृश्यता बाधित होने से आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।
स्थायी जब्ती और कड़े एक्शन की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों और राहगीरों ने नगर निगम के उच्च अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि केवल जुर्माना लगाने की खानापूर्ति बंद की जाए। जब तक अवैध दुकानदारों के सामानों की स्थायी जब्ती नहीं होगी और क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराकर चौकसी नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक आम जनता को इस भीषण जाम से राहत मिलना नामुमकिन है।

