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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष: ‘योग’ व्यायाम नहीं, मन को समझने का विज्ञान है– योग गुरु प्रिंस

24CITYLIVE/आदर्श सिंह/पटना:भागवत नगर): आगामी 21 जून को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना है। इस खास अवसर को लेकर पटना सिटी के भागवत नगर में तैयारियां और चर्चाएं जोरों पर हैं। इसी कड़ी में डिजिटल न्यूज पोर्टल **’24CityLive’** की टीम ने **’योगा विद प्रिंस’ (Yoga with Prince)** के योग गुरु प्रिंस से एक विशेष मुलाकात की। इस बातचीत में उन्होंने आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में योग के असली महत्व को बड़े ही सरल शब्दों में समझाया।


क्या है योग? समझ में ही है समाधान
आमतौर पर लोग आसन और प्राणायाम को ही योग मान लेते हैं, लेकिन योग गुरु प्रिंस ने इस धारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल शारीरिक कसरत ही योग नहीं है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के सूत्र **’योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’** का जिक्र करते हुए कहा कि “चित्त की वृत्तियों (मन के विचारों और भटकाव) को रोकना ही वास्तव में योग है।” जब तक हम अपने मन को नहीं समझेंगे, तब तक हम योग के वास्तविक स्वरूप को नहीं जान पाएंगे।


तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन का एकमात्र इलाज
आज के समय में युवाओं और हर वर्ग के लोगों में बढ़ती एंग्जायटी, डिप्रेशन और मानसिक तनाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा:
“शारीरिक स्वास्थ्य तो योग का एक ‘बाय-प्रोडक्ट’ (सह-परिणाम) है, जो योग करने पर स्वतः ही मिल जाता है। लेकिन योग का असली केंद्र बिंदु हमारा मन है।”



उन्होंने आगे आयुर्वेद और योग के सिद्धांत *आधि-व्याधि’ को समझाते हुए कहा कि किसी भी शारीरिक रोग (व्याधि) की शुरुआत असल में हमारे मन (आधि) से होती है। इसलिए, शरीर पर चाहे जितनी भी मेहनत कर ली जाए, जब तक मन को शांत और संतुलित नहीं किया जाएगा, बीमारियां पूरी तरह खत्म नहीं हो सकतीं।
शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने का जरिया
योग गुरु प्रिंस ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर लोगों को संदेश देते हुए कहा कि यदि हम अपने जीवन में शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से पूरी तरह स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो हमें अपनी मान्यताओं को परखना होगा और योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

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