ऑनलाइन ठगी होने पर क्या करें? डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया फ्रॉड से पैसा बचाने का पूरा तरीका

24CITYLIVE/आदर्श सिंह/पटना:आज के डिजिटल युग में जितनी तेजी से तकनीक बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराधी भी सक्रिय हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, बैंक फ्रॉड, और सोशल मीडिया हैकिंग जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने और आम जनता को जागरूक करने के लिए पटना साइबर पुलिस स्टेशन के डीएसपी (DSP) नीतीश चंद्र धारिया ने विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति साइबर अपराधियों का शिकार बनता है, तो उसे बिना समय गंवाए सही प्रक्रिया अपनानी चाहिए ताकि उसका नुकसान होने से बच सके।
1930 नंबर और ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व
डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने विशेष रूप से ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ठगी होने के बाद का शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर पीड़ित व्यक्ति फ्रॉड होने के तुरंत बाद (शुरुआती 1 से 2 घंटे के भीतर) भारत सरकार के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराता है, तो पुलिस और बैंकों का समन्वय तंत्र सक्रिय हो जाता है। इस त्वरित कार्रवाई से अपराधी के खाते में ट्रांसफर हुए पैसे को होल्ड (ब्लॉक) कर दिया जाता है, जिससे पीड़ित का पैसा वापस मिलने की संभावना शत-प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
इन 3 तरीकों से दर्ज कराएं अपनी शिकायत:
- हेल्पलाइन नंबर: तुरंत 1930 पर डायल करें और फ्रॉड की पूरी जानकारी दें।
- ऑनलाइन पोर्टल: केंद्रीय गृह मंत्रालय के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कराएं।
- साइबर थाना: पीड़ित अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या जिला पुलिस के साइबर सेल में जाकर भी लिखित आवेदन दे सकते हैं।
शिकायत के समय इन दस्तावेजों को रखें तैयार:
डीएसपी ने बताया कि त्वरित जांच के लिए शिकायत दर्ज करते समय कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य बेहद जरूरी हैं:
- ट्रांजैक्शन आईडी (Transaction ID) और बैंक स्टेटमेंट।
- धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर या फर्जी वेबसाइट का लिंक।
- अपराधियों द्वारा भेजे गए मैसेज, व्हाट्सएप चैट या सोशल मीडिया प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट।
पटना साइबर पुलिस की अपील:
डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में कोई रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें। अपना बैंक ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN), या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।



