24CITYLIVE/आदर्श सिंह/पटना: नालंदा मेडिकल कॉलेज में मंगलवार, 27 अक्टूबर को प्रवेश बैच 2026 के नवप्रवेशित मेडिकल छात्र-छात्राओं के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी सह ओरिएंटेशन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कॉलेज के ऑडिटोरियम में दोपहर 12 बजे से आयोजित इस गरिमामयी समारोह के दौरान नए सत्र के सभी विद्यार्थियों को व्हाइट कोट पहनाया गया, जो इस बात का प्रतीक है कि उनका यह नया सफर केवल चिकित्सा या उच्च शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव सेवा और उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा, कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था और चिकित्सकीय पेशे की जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए विद्यार्थियों को चिकित्सा पेशे के मूल्यों, सेवा भावना, अनुशासन और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता का महत्व समझाना था। व्हाइट कोट सेरेमनी को मेडिकल विद्यार्थियों के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है, क्योंकि सफेद कोट चिकित्सा पेशे में सेवा, समर्पण, नैतिकता और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का शाश्वत प्रतीक है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उषा कुमारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि व्हाइट कोट पहनने का अर्थ केवल एक चिकित्सक बनने की दिशा में कदम बढ़ाना नहीं है, बल्कि पूरी ईमानदारी के साथ मानवता की सेवा करने की भारी जिम्मेदारी स्वीकार करना भी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सलाह दी कि वे अपने जीवन में हर स्तर पर पूर्ण अनुशासन बनाए रखें और अपने से वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सहपाठियों के साथ पूरी आदर-सम्मान के साथ पेश आएं।
उन्होंने विशेष जोर दिया कि संस्थान परिसर में किसी भी प्रकार के जाति, वर्ग या समुदाय आधारित भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि एक आदर्श शैक्षणिक माहौल वही है जहां हर छात्र खुद को पूरी तरह सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सके।
कॉलेजों में रैगिंग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने और विद्यार्थियों के बीच आपसी सौहार्द व अनुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस मंच पर रैगिंग से संबंधित विषयों को भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच सम्मानजनक व्यवहार, आपसी सहयोग और भाईचारा चिकित्सा शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए कॉलेज प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति को पूरी सख्ती के साथ लागू किया है। इस नीति को धरातल पर उतारने और परिसरों में अनुशासन कायम रखने के लिए कई स्तरों पर कमेटियों का गठन किया गया है, जिनमें एक सक्रिय एंटी-रैगिंग स्क्वाड और एक एंटी-रैगिंग कमेटी प्रमुख रूप से शामिल हैं जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखती हैं। इसके अतिरिक्त, हॉस्टल परिसरों में सुव्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन वरिष्ठ विभागाध्यक्षों को हॉस्टल एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में नियुक्त किया गया है, ताकि वे छात्र आवासों की नियमित निगरानी कर सकें।
कॉलेज प्रशासन ने सभी नए विद्यार्थियों को पूर्ण रूप से आश्वस्त किया है कि उन्हें डरने या घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि किसी भी छात्र के साथ किसी भी स्तर पर रैगिंग या मानसिक प्रताड़ना जैसी कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो वे पूरी तरह निर्भीक होकर सीधे प्रशासन के पास आ सकते हैं। प्रशासन ऐसे मामलों में बिना किसी देरी के त्वरित संज्ञान लेगा और जो भी व्यक्ति इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, प्रोफेसर और अस्पताल के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम के माध्यम से नए विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ चिकित्सक बनने के लिए गहराई से प्रेरित किया गया।



