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पटना यूनिवर्सिटी: PhD नामांकन धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल का 5वां दिन, आंदोलनकारी छात्र नेता की स्थिति चिंताजनक; आंदोलन को मिला कर्मचारी संघ का समर्थन

पटना (24CityLive ब्यूरो)पटना विश्वविद्यालय (PU) के सत्र 2025 PhD नामांकन में कथित भ्रष्टाचार, अपारदर्शिता और पक्षपात के खिलाफ छात्रों का आंदोलन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ‘रिसर्च स्कॉलर संघर्ष समिति’, AISF और PFVC के संयुक्त बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज मंगलवार (19 मई) को पांचवें दिन भी जारी रहा। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच हुई वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही, जिसके बाद छात्रों में आक्रोश और बढ़ गया है।


अनशनकारी छात्र नेता की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों ने जताई चिंता
लगातार पांच दिनों से अन्न-जल त्यागने के कारण PFVC के बिहार प्रदेश महासचिव विद्यानंद पासवान की तबीयत काफी बिगड़ गई है। आज डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने अनशन स्थल पर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जांच की और उनकी स्थिति को चिंताजनक बताया है। हालांकि, गिरते स्वास्थ्य के बावजूद विद्यानंद पासवान अपने संकल्प पर अड़े हुए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि, *”जब तक PhD नामांकन में ‘Only PhD’ उत्तीर्ण छात्रों को उनका हक नहीं मिलता और उन्हें शामिल नहीं किया जाता, तब तक यह भूख हड़ताल जारी रहेगी।”*


आंदोलन को मिला PU कर्मचारी संघ का साथ, दी बड़ी चेतावनी
इस आंदोलन को आज उस वक्त और बड़ी मजबूती मिली जब पटना विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ खुलकर छात्रों के समर्थन में आ गया। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुबोध जी और महासचिव फरहान जी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि, *”अगर कुलपति (VC) जल्द से जल्द छात्रों के साथ सार्थक वार्ता कर इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं निकालते हैं, तो पूरा कर्मचारी संघ भी छात्रों के साथ धरने पर बैठने को मजबूर होगा।”*

क्या है पूरा विवाद?
आंदोलन कर रहे छात्रों का आरोप है कि सत्र 2025 के PhD नामांकन में CSIR और UGC-NET (PhD Only) उत्तीर्ण छात्रों से पहले फॉर्म भरवाया गया, लेकिन बाद में उन्हें नामांकन प्रक्रिया से ही वंचित कर दिया गया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर नामांकन में भारी पक्षपात और धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस मामले पर AISF के राज्य सह सचिव कॉमरेड सुशील उमाराज ने कहा कि, *”PhD जैसी उच्च शिक्षा के नामांकन में जिस तरह की अपारदर्शिता बरती गई है, उसकी एक उच्च स्तरीय जांच होनी बेहद जरूरी है। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”*


धरने पर डटे हैं कई छात्र नेता
विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने में छात्र नेत्री प्रीति पासवान, जाह्नवी रॉय, पूजा कुमारी सहित छात्र नेता कृष्णा कुमार, सुधांशु राठौड़, सत्यम, और अंकुश कुमार समेत भारी संख्या में रिसर्च स्कॉलर्स और छात्र शामिल हैं।
फिलहाल, छात्र की बिगड़ती स्थिति और कर्मचारी संघ के अल्टीमेटम के बाद अब देखना होगा कि पटना विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

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